दादी अम्मा !!!

मैं इधर उधर करबटें बदलता रहा पर नींद थी कि आने का नाम ही नहीं ले रही थी. यूँ तो पलंग पूरा पांच फ़ीट चौंड़ा था पर मेरे हिस्से बस तीन-सवा तीन फ़ीट ही आता था, वाकी का पूरा दो फ़ीट लक्ष्मीकांत, रमेश सिंह और स्पेक्ट्रम जैसी किताबों  से भरा हुआ था. ये किताबें थी ही ऐसी कि मैं चाहकर भी अपने आप को इनसे दूर न रख पाता. मुझे हमेशा से डर था की अगर ये नाराज़ हो गए तो मेरा काम तमाम.

खैर, उस दिन का वाकया भी वाकी दिनों से कुछ अलग था, उस दिन पहली बार मेरी और उसकी झड़प हुई. मैंने न चाहकर भी उसको काफी कुछ सुना दिया. उसे थोड़ा बुरा भी लगा होगा. बाद में हालाँकि मुझे इस बात का अनुताप भी हुआ, पर भाई अब पछताए होत का जब चिड़यां चुग गई खेत.

मोबाइल में देखा तो रात के दो बज रहे थे. जैसे तैसे मैंने सिर तक चादर चढाई और राम नाम ले कर सो गया. पर ज़नाब खेल तो अभी सुरु हुआ था, मेरी आँख लगते ही जैसे उसने मुझे डराने की कवायद सुरु कर दी. मानो उसको तो इसी चीज़ का इंतज़ार था, कि कब मेरी आँख लगे और कब वह एक डरावना सा ख्वाब बन के मेरे सपनों में आए और अपना बदला ले.

अचानक से डर के मारे मेरी नीदं खुली, देखा तो छह बज गए थे. अपना मोबाइल और इअरपॉड्स उठाये और सुबह सुबह दौड़ने निकल गया.

बाहर जाकर देखा तो वो दादी अम्मा भी घूमने निकली थीं. वैसे तो मेरी और उनकी ज्यादा पहचान न थी, वह नीचे वाली फ्लैट में रहती थी, हम बस सुबह सुबह ही मिलते थे. पहले एक दो दिन मेंने उनका “राम राम दादी ” कर के अभिवादन किया, पर दादी का उत्त्तर आया ” Hi Beta, How are you”.  उस दिन मुझे अहसास हुआ की वैश्वीकरण, पाश्चात्यिकरण और आधुनिकीकरण की ज़डें कितनी गहरी हैं. उस दिन का दिन था कि आज तक मैं कभी किसी से “राम राम ” न की .

खैर, उस दिन दादी अम्मा कुछ परेशान सी लग रही थीं. उनके माथे पर अजीब सी शिकन थी, बात करने का तरीक़ा भी  बदला बदला लगता था. मुझसे रहा न गया “क्या हुआ दादी क्या बात है, कोई परेशानी हो तो बताओ ” मैंने पूँछ ही लिया.

“Arey Beta, what do I tell you ” दादी अपना दुखड़ा रोते हुए बोली,  “मैंने इतने प्यार से पला पोसा है इस अभिनाश को. छोटा सा था जब इसकी माँ गुज़र गई, तब से इसे सीने से लगा के रखा है ”  दादी को तो जैसे रोना सा आ गया. अभिनाश उनका एकलौता पोता था, मैं और अभिनाश अच्छे दोस्त भी थे

मुझसे रहा न गया , मैंने कहा ” दादी क्या बात है बताओ, मैं मदद करता हूँ ”

“अरे बेटा क्या बताऊ पिछले हफ्ते से रोज उसको बोलती हूँ, आज चार दिन हो गए पर सुनता ही नहीं ” दादी बोली

“दादी मगर काम क्या है बताओ तो, मैं आज कर देता हूँ ” मैंने सहाभूति ज़ाहिर करते हुआ कहा.

“अरे बेटा कुछ नहीं, वो टाटा स्काई का रिचार्ज करवाना है, Game Of Thrones का नया सीजन चालू हुआ है और H.B.O. आता ही नहीं, पूरा सीजन निकला जा रहा है ”

मैं चुपचाप सुनता रहा !!!

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