पर फिर भी चलता जाऊंगा !!!

माना मैं एक अकेला हूँ ,
मैं अजब और अलबेला हूँ ,
माना मैं ठोकर खाऊंगा,
पर फिर भी चलता जाऊंगा,

दुनिया का मुझको भेद नहीं ,
और हार जीत का खेद नहीं ,
उन्मुक्त गगन में पंछी बन ,
अपने पर मैं फैलाऊंगा,

वीभत्स अँधेरा हो चाहे ,
दिनकर भी तपता हो चाहे ,
चाहे हो पथ में शैल विशाल ,
या हो सौदामिनी की दहाड़,

रुकने का लेना नाम नहीं ,
डरने का कोई काम नहीं ,
माना मैं ठोकर खाऊंगा,
पर फिर भी चलता जाऊंगा !!!

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