पर रुकना तेरा काम नहीं !!

पता है दूर है मंज़िल ,
रास्ता भी है कहीं ओझल ,
पर डरना तेरा काम नहीं ,
पर रुकना तेरा काम नहीं ,

थक जाये जो राह में तू ,
तो कर ले रात्रि विराम वहीँ ,
पर डरना तेरा काम नहीं ,
पर रुकना तेरा काम नहीं ,

चलते जाते जो राही हैं ,
मंज़िल को पाते वो ही हैं ,
है गीता का भी सार यही ,
पर डरना तेरा काम नहीं ,
पर रुकना तेरा काम नहीं,

मंज़िल मिलती है सबको ही ,
है देर यहाँ अंधेर नहीं ,
पर डरना तेरा काम नहीं ,
पर रुकना तेरा काम नहीं  !!

 

*ओझल –  Invisible

 

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